‘परसंचालित नहीं स्वसंचालित बनें’: डॉ पवन गुप्ता

*युवा प्रेरणा यात्रा-2016, चौथा दिन, कैम्पटी फॉल, उत्तराखण्ड

युवा प्रेरणा यात्रा-2016 का कारवां यात्रा के चौथे दिन मसूरी से 12 किमी. की दूरी पर स्थित कैम्पटी फॉल पहुँचा जहां  सिद्ध संस्था (SIDH -Society  for integrated development of Himalayas) के संस्थापक डॉ. पवन गुप्ता जी ने युवाओं की बुनियादी सीख और समझ को सम्बोधित किया। उनके विचारों से सभी ‘चैम्पस’ भावविभोर हो उठे और सोचने पर विवश हो उठे।

डॉ. पवन गुप्ता ने अपनी मात़ृभाषा का सम्मान करने के प्रसंग में युवाओं से कहा- “ मेरी माँ बदसूरत भी है तो वो मेरी माँ है, जिसके प्रति मेरे हृदय में सम्मान किसी भी कीमत पर कम नहीं हो सकता।” ऐसा कहते हुये वे भावुक हो उठे। उन्होंने आगे कहा- हर विधा की अपनी एक संस्कृति होती है जो आपको एक निश्चित तौर पर व्यवहार करने के लिये आप पर दबाव बनाती है।” इस कारण हम जिस भी परिवेश में रहते हैं वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। मसलन इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट का माहौल, कोर्पोरेट्स का माहौल, मीडिया अथवा अभिजात वर्ग का माहौल इत्यादि। हम कभी अपने आस-पास के लोगों पर अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं तो कभी दूसरों से प्रशंसा पाना चाहते हैं। हम स्वयं के भीतर नहीं झांकते और समाज के परिवेश के अनुसार ही व्यवहार करते हैं जो भले ही हमारे नैसर्गिक स्वभाव के विपरीत ही क्यों न हो। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को भिन्न सिद्ध करना चाहता है लेकिन मौजूदा तंत्र की मुख्य धारा में भी बने रहना चाहता है और ये दोनों ही बातें विरोधाभासी हैं. (“Everybody wants to be unique and wants to be fit in and both the things are controversial.”) हम असुरक्षित हैं क्योंकि हम उत्पादन क्षमता नहीं रखते. (“We are insecure because we can’t produce a single thing.”) “परसंचालित नहीं स्वसंचालित बनें।” अपने दिल की सुनें, दूसरों से शाबाशी पाने के लिए, दूसरों को प्रभावित करने के लिये क्रियान्वित न हों ।

उन्होंने आधुनिक समाज में दी जा रही शिक्षा पद्धति की कमियों को उजागर किया और सीखने’ तथा समझने’ के अन्तर पर बल दिया। उन्होंने सिद्ध की स्थापना एवं उसकी यात्रा की कहानी भी युवाओं से साझा की तथा बताया कि शुरू में सिद्ध के 17 विद्यालय संचालित होते थे जो कि अब घटकर केवल 3 ही रह गये हैं जो आज भी डॉ. गुप्ता द्वारा विकसित की गई तार्किक एवं प्रायोगिक शिक्षा पद्धति से ही संचालित होते हैं।

सिद्ध संस्था मुख्यतः शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है जिसका लक्षित समूह बच्चे, युवा, शिक्षक एवं स्थानीय कम्युनिटी है। सिद्ध आंशिक रूप से वित्त पोषित संस्था है जो कि पूर्ण वित्तीय स्वतंत्रता की ओर बढ़ रही है।

सिद्ध के क्रिया-कलापों में विद्यालयों का संचालन, शिक्षको की ट्रेनिंग से जुड़ी कार्यशाला, युवा कार्यक्रम, शोध प्रोजेक्ट्स और प्रकाशन इत्यादि सम्मिलित हैं।

 

 

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