जन-भागीदारी से बदला परिवेश

07 अप्रैल,2016 #युवा प्रेरणा यात्रा #पांचवा दिन

युवा प्रेरणा यात्रा के पांचवें दिन ये काफिला दो पड़ावों से होकर गुज़रा। जहां सुबह धनौल्टी ईको पार्क में हुई तो दिन का दूसरा पड़ाव ऋषिकेष में स्थित गूँज संस्था का कार्यालय रहा । धनौल्टी और गूँज दोनों ही स्थानों पर जनता की भागीदारी से समाज और परिवेश में आये बदलाव को युवाओं ने जानने का प्रयास किया।

धनौल्टी ईको पार्क

युवा प्रेरणा यात्रा का कारवां यात्रा की पांचवी सुबह धनौल्टी ईको पार्क पहुंचा, जहां युवाओं ने ईको टूरिज़्म के क्षेत्र में नवाचार(innovations) की संभावनाओं के विषय में जानकारी प्राप्त की । धनौल्टी में एस.डी.ओ. एन.के.शर्मा ने युवाओं को बताया कि किस प्रकार आस-पास के लोगों की मदद से एक अनुपयोगी ज़मीन को राजस्व के लिए उपयोगी बनाया गया । धनौल्टी ईको पार्क, मसूरी, चम्बा स्टेट हाईवे पर बसा एक ऐसा पार्क है जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का बेहतरीन उदाहरण हैं। सन् 2008 में मसूरी चम्बा संभाग के तत्कालीन डी.एफ.ओ. ने धनौल्टी क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर ये शुरूआत की और आठ साल पहले 80-90 लाख रूपये की लागत से बने इस पार्क ने पर्यावरण की सुरक्षा तो संरक्षित की ही, साथ ही अब तक लगभग 2 करोड़ 63 लाख की आय भी उत्पादित कर ली।

एसडीओ एन.के.शर्मा ने युवाओं को बताया कि भारत का वन विभाग किस प्रकार काम करता है और किस प्रकार धनौल्टी ईको पार्क ने अपने प्रयासों से देश के सामने पर्यटन क्षेत्र में उद्यम के नये मॉडल को स्थापित किया। यह पार्क अम्बर और धरा नाम के दो हिस्सों में बंटा है। ऊपरी भाग को अम्बर तथा निचले हिस्से को धरा के नाम से जाना जाता है। इस पार्क के बनने के बाद स्थानीय लोगों को भी रोज़गार मिला। हर साल यहां लगभग डेढ़ लाख पर्यटकों का आना होता है। उन्होंने यात्रा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पर्यटन तथा ईको पर्यटन के बीच का अन्तर भी समझाया। ईको पर्यटन यानि पारिस्थितिकी पर्यटन के अन्तर्गत वे प्राकृतिक स्थान आते हैं जिनमें ज़्यादा छेड़ छाड़ किये बिना और प्रकृति को नुकसान पहुँचाये बिना उसे ख़ूबसूरत बनाने का प्रयास किया जाता है। ऐसी जगहों को एक शोध के ज़रिए चिन्हित किया जा सकता है तथा उन्हें विकसित किया जा सकता है।

गूँज…ए वॉयस, एन एफर्ट

धनौल्टी के बाद यात्रा गूँज,ऋषिकेष पहुँची जहाँ संस्था के संस्थापक-प्रबन्धक एवं रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित अंशु गुप्ता ‘चैम्पस’ से रू-ब-रू हुये जहाँ उन्होंने देश की उन समस्याओं से युवाओं को अवगत कराया जिस ओर आम तौर पर लोगों का ध्यान नहीं जाता। गूँज के प्रयासों एनजेपीसी (नॉट जस्ट ए पीस ऑफ क्लॉथ), ओढ़ा दो ज़िन्दगी, ग्रो ग्रीन बाई गूँज एवं समाज के लिए किये गये उनके और भी कार्यों को युवाओं ने जाना।

अंशु गुप्ता ने शिक्षा,सड़क-सुरक्षा, ग़रीबी,रोटी,कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी ज़रूरतों पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया.जीवन की कड़वी यथार्थता से लोगों का परिचय कराने का प्रयास करते हुये उन्होंने कहा – “हमें गुस्सा आना क्यों बन्द हो गया ? हमें विचारकों की नहीं कर्ताओं की आवश्यकता है.गूंज से प्रेरित हो तो नॉन-गूँज काम करो और तीसरी यात्रा पर मत जाना क्योंकि यात्राओं से जीवन नहीं बदलता.”

गूँज भी जन भागीदारी के कारण ही अपने कार्यों में सफल हो सका, इस बात के कई उदाहरण उन्होंने अपनी बात-चीत के दौरान दिये। गूँज की महिलाओं ने सभी प्रतिभागियों का विशेष स्वागत किया और युवाओं ने उनके काम-काज का जायज़ा भी लिया।

 

 

 

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