यात्रा आपको एक बेहतर इन्सान बनाती है : जी.के. स्वामी

युवा प्रेरणा यात्रा-2016, 04 अप्रैल, दूसरा दिन, #पुरूकल यूथ डेवलपमेन्ट सोसाइटी

छोटे-छोटे बच्चे बड़ी सी स्क्रीन पर पावर प्वॉइन्ट प्रेज़ेन्टेशन के लिए तैयारी करते हुये, स्लाइड्स जांचते हुये, प्रोजेक्टर लगाते हुये और माइक ठीक करते हुये…..ये नज़ारा था हिमालय की घाटी में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के बीच देहरादून से कुछ दूरी पर बसे पुरूकल गांव के एक विशेष विद्यालय का ।

युवा प्रेरणा यात्रा-2016 अपनी यात्रा के दूसरे दिन और दिन के दूसरे भाग में पुरूकल यूथ डेवेलपमेन्ट सोसाइटी के परिसर में पुहँच चुकी थी जहाँ ‘चैम्पस’ (युवा प्रेरणा यात्रा के प्रतिभागियों को इस नाम से पुकारा जाता है।) रू-ब-रू हुये नन्हें मुन्हें बच्चों से। इस परिसर की विशेषता यही थी कि यहाँ किसी रोल मॉडल की जगह यहाँ के बच्चों ने ही इस परिसर के क्रियान्वयन और विशेषताओं के बारे में युवाओं को अवगत कराया।

पुरूकल यूथ डेवलपमेन्ट सोसाइटी की स्थापना 2003 में जी.के. स्वामी द्वारा पुरूकल और उसके आस-पास के गांवों के ज़रूरतमन्द बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी । आज उनका सपना फल-फूल रहा है । इतना ही नहीं बल्कि जी.के. स्वामी की पत्नी श्रीमती चिन्नी स्वामी  पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के ज़रिये महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी काम कर रही हैं।

जी. के. स्वामी, संस्थापक PYDS #Champion Of YPY-2016

जी. के. स्वामी, संस्थापक PYDS #Champion Of YPY-2016

दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा इन युवाओं को सम्बोधित करते हुये बताती है कि पीवाईडीएस (पुरूकल यूथ डेवेलपमेन्ट सोसाइटी) किस ढांचें पर काम करता है और इस परिसर में बच्चों का प्रवेश किस आधार पर होता है। वो बताती है कि पीवाईडीएस में प्रवेश पाने के लिए कुछ ज़रूरी बातें ये है कि बच्चा ग़रीब परिवार से सम्बन्ध रखता हो जिनकी सालाना आय 1.5 लाख रूपये से भी कम हो , उसे भले ही प्रवेश के समय कुछ भी ज्ञान ना हो लेकिन उसमें आगे बढ़ने की लगन और क्षमता हो ।

वो यह भी बताती है कि ज़रूरतमन्द बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रशासन की एक सर्वे टीम काम करती है जो कि 5 जलग्रहण क्षेत्रों और आस-पास के लगभग 41 गांवों से बच्चों को चुनकर इस विद्यालय तक लाती है और उन्हें गुणवत्ता परक शिक्षा मुहैय्या कराती है।

इसी कड़ी में एक और छात्रा साक्षी चैम्पस को ये बताती है कि किस तरह उनका विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक,मानसिक,भावनात्मक और आध्यात्मिक इन सभी पहलुओं पर काम करता है और बच्चे को एक सम्पूर्ण विकास प्रदान करने का प्रयास करता है।

दसवीं कक्षा की छात्रा मुस्कान बताती हैं कि उनके विद्यालय से पढ़े कितने ही विद्यार्थी विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और आई टी, शिक्षा, मेडिकल आदि विभिन्न क्षेत्रों में उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं। अपने कुछ सीनियर्स का उदाहरण देते हुए मुस्कान अपने बारे में ये भी बताती है कि वो ब्राउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका से प्राप्त छात्रवृत्ति के तहत 2 महीनों के एक समर प्रोग्राम में हिस्सा ले रही हैं। इन सभी अवसरों के लिए वो पीवाईडीएस के दिशा-निर्देशन (एक्सपोज़र कार्यक्रम) को उत्तरदायी मानती हैं।

PYDS में पढ़ने वाले बच्चे चैम्पस के साथ

PYDS में पढ़ने वाले बच्चे चैम्पस के साथ

यात्रा चैम्प विलासिनी जी. के. स्वामी तथा अन्य युवाओं से अपना अनुभव साझा करते हुए एक छात्रा अमीषा का ज़िक्र करती हैं और कहती हैं कि अमीषा ने उन्हें बताया कि वो लोग अपनी पॉकेट मनी के पैसे इकट्ठा कर कॉपी-किताबें, पेन-पेन्सिल आदि स्टेशनरी का सामान ख़रीदते हैं और दूसरे ज़रूरतमन्द बच्चों को उपहार स्वरूप भेंट करते हैं और इस तरह देने की जो आदत इतनी कम उम्र में इन बच्चों में पनप रही है वो उन्हें अभिभूत कर गई। इस अनुभव पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी जी कहते हैं – “ लाइफ़ इज़ फॉर गिविंग (Life is for giving).” यही हमारा उद्देश्य है।

यात्रा चैम्प विलासिनी #YPY 2016

यात्रा चैम्प विलासिनी #YPY 2016

जी.के. स्वामी जी से उनके गुणवत्ता परक शिक्षा कार्यक्रम के स्वरूप होने वाले पलायन के विषय में पूछे गये एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में वे कहते हैं – “ यात्रायें आपको एक बेहतर से भी बेहतर इन्सान बनाती हैं और आप वापस लौट आते हैं अपने देश की सेवा करने के लिये और मैं ये वादा कर सकता हूँ कि आने वाले 10 सालों में ये देश बाहर वालों के लिए सबसे अधिक आकर्षण का केन्द्र होगा और बाहरी लोग भी यहाँ आना चाहेंगे।”

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति की संस्थापक चिन्नी स्वामी युवाओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुये अपनी यात्रा के बारे में बताती हैं कि किस तरह उन्होंने एक महिला के साथ काम करना शुरू किया था और आज लगभग 150 महिलायें पुरूकल स्त्री शक्ति समिति का हिस्सा हैं। चिन्नी स्वामी कहती हैं – “ इस इलाके की अपनी कोई ख़ास विधा नहीं थी इसलिए उन्होंने नई विधाओं से इन महिलाओं को रू-ब-रू कराया। पैच वर्क, कढ़ाई और पाश्चात्य डिज़ाईनों के स्थानीयकरण पर काम किया। स्थानीय डिज़ाईनों पर काम करने के कारण ये उत्पाद उस क्षेत्र में अपनी जगह बना सके। जब महिलाओं ने धन अर्जित करना शुरू किया तो साथ ही वो अपने परिवारों में सम्मान अर्जित कर पाने में भी सफल रहीं। ” उन्होंने इन महिलाओं को सिखाया कि उनके काम में सम्पूर्णता (परफ़ेक्शन) और गुणवत्ता (क्वालिटी) कितनी महत्वपूर्ण हैं। चलता है” वाली सोच से काम नहीं चलेगा।

चिन्नी स्वामी,संस्थापक पुरूकल स्त्री शक्ति समिति...#Champion Of YPY2016

चिन्नी स्वामी,संस्थापक पुरूकल स्त्री शक्ति समिति…#Champion Of YPY2016

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के अन्तर्गत लगभग 10 स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं जो यहाँ से प्रशिक्षण,सहायता और कौशल से जुड़ी मदद बहुत ही कम मूल्य पर प्राप्त करते हैं। स्री शक्ति समिति का ये उद्देश्य है कि ये सभी स्वयं सहायता समूह स्वतंत्र उद्यम के तौर पर विकसित हो सकें और इससे जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के अन्तर्गत कार्य करती महिलायें

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के अन्तर्गत कार्य करती महिलायें

 

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