‘जुगाड़ इज़ इनोवेशन’: डॉ. वन्दना शिवा

*युवा प्रेरणा यात्रा-2016, 04 अप्रैल, दूसरा दिन, #नवदान्या बायोडायवर्सिटी फार्म

चारों ओर हरे-भरे आम के बगीचे, ठंडी हवा के बीच बना बरामदा, चारों ओर गूंजता पक्षियों का कलरव और पहाड़ों की धरती उत्तराखंड में प्राकृतिक वातावरण के बीच उद्यमिता का मंत्र तलाशते युवा.ये नज़ारा था युवा प्रेरणा यात्रा-2016 की यात्रा के दूसरे दिन का. यात्रा के पहले पड़ाव पर युवाओं को देहरादून से कुछ दूरी पर रामगढ़ स्थित नवदान्या बायोडायवर्सिटी फार्म में जैविक कृषि पर आधारित मॉडल से रू-ब-रू होने का मौक़ा मिला, जहां डॉ. वन्दना शिवा ने ‘चैम्पस’ को नवदान्या (नवधान्या- नौ प्रकार के अनाज) के सफ़र के बारे में बताया. नवदान्या का अर्थ होता है नौ दाने अर्थात् नौ बीज जो कि जैविक तथा सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक हैं .

Navdanya pic

भौतिक विज्ञानी तथा चिपको आन्दोलन में एक स्वयंसेवी की भूमिका निभा चुकी डॉ.शिवा युवाओं को बताती हैं कि भारत बहुधा संस्कृतियों और बहुधा खाद्य-संस्कृतियों का देश है. विविधताओं की भूमि का देश है. हमारे राष्ट्र-गान में ‘पंजाब,सिन्ध,गुजरात,मराठा, द्राविड़,उत्कल,बंग’ की बात की गई है क्योंकि हम भूमि को पूजते हैं  इसलिए इसे बंजर होने से रोकना हमारा कर्तव्य है.हम बाहरी लोगों को हमारी ज़मीन नष्ट करने का अधिकार नहीं दे सकते.”

डॉ. शिवा ने कृषि क्षेत्र में बीजों तथा उर्वरकों इत्यादि का व्यापार करने वाली अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनी मोनसेन्टो से चल रहे विवाद के बारे में भी बताया कि किस प्रकार उन्होंने मोन्सेन्टो को चुनौती दी. मोन्सेन्टो सतत् कृषि (सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) की बात करता है लेकिन उसके द्वारा कृषकों को उपलब्ध कराये जाने वाले राउण्ड अप में ग्लाईफोसेट का इस्तेमाल होता है जो कि कैंसर और किडनी फेल्योर जैसी बिमारियों के लिए उत्तरदाई पाया गया है और इस तरह की कृषि हमारी भूमियों को बंजर बना रही है, साथ ही हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचा रही हैं. वो एक उदाहरण के तौर पर बताती हैं कि यदि विभिन्न तरीके की दालों को दूसरी ऐसी फसलों के साथ उगाया जाये जिनमें खाद के तौर पर यूरिया की आवश्यकता होती है तो ये दालें ही वो काम जैविक रूप से कर देंगी जो यूरिया करता है और इस तरह फसल पूरी तरह प्राकृतिक रहेगी तथा कृत्रिम खाद से बच सकेगी. दालें भी यूरिया की तरह नाइट्रोजन को संतुलित करने का काम करती हैं (Pulses are good nitrogen fixers.).

Dr. Vandana Shiva

एक चैम्प के जुगाड़ को भ्रष्टाचार से जोड़ने पर डॉ. शिवा मज़ाकिया लहज़े में कहती हैं- जुगाड़ इज़ इनोवेशन, जुगाड़ इज़ नॉट करप्शन. ” उनकी ये बात सुनते ही सभी खिलखिला उठते हैं और प्राकृतिक वातावरण में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठती है. वो अपनी इस बात के तर्क में उत्तर-प्रदेश में जुगाड़ से बनाये गये एक ट्रैक्टर की बात भी करती हैं और उसे इनोवेशन कहती हैं. वो युवाओं को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का पाठ पढ़ाती हैं और मानवता को अपनाने को कहती हैं.

युवाओं ने उनके फार्म में विविध प्रकार की फसलों का ज़ायजा लिया और देखा कि किस तरह पूरक फसलों का प्रयोग एक खेत में किया जा रहा है. सालों से बंजर जमीं को जैविक खेती की मदद से ऊपजाऊ बनाया गया. सभी ने एक अनाजा, दो अनाजा, नौ अनाजा, बारह अनाजा और तरह तरह की फसलों के बारे में समझा. साथ ही चना, आलू और अनाज के खेतों सहित कपूर का पेड़ भी देखा जो मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों में ही पाया जाता है.

नवधान्या की सभा के बाद युवा प्रेरणा यात्रा का अगला पड़ाव था पुरूकल यूथ डेवलेपमेन्ट सोसाइटी जहां शिक्षा और स्त्री सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण युवाओं की राह देख रहा था.

 

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