जन-भागीदारी से बदला परिवेश

07 अप्रैल,2016 #युवा प्रेरणा यात्रा #पांचवा दिन

युवा प्रेरणा यात्रा के पांचवें दिन ये काफिला दो पड़ावों से होकर गुज़रा। जहां सुबह धनौल्टी ईको पार्क में हुई तो दिन का दूसरा पड़ाव ऋषिकेष में स्थित गूँज संस्था का कार्यालय रहा । धनौल्टी और गूँज दोनों ही स्थानों पर जनता की भागीदारी से समाज और परिवेश में आये बदलाव को युवाओं ने जानने का प्रयास किया।

धनौल्टी ईको पार्क

युवा प्रेरणा यात्रा का कारवां यात्रा की पांचवी सुबह धनौल्टी ईको पार्क पहुंचा, जहां युवाओं ने ईको टूरिज़्म के क्षेत्र में नवाचार(innovations) की संभावनाओं के विषय में जानकारी प्राप्त की । धनौल्टी में एस.डी.ओ. एन.के.शर्मा ने युवाओं को बताया कि किस प्रकार आस-पास के लोगों की मदद से एक अनुपयोगी ज़मीन को राजस्व के लिए उपयोगी बनाया गया । धनौल्टी ईको पार्क, मसूरी, चम्बा स्टेट हाईवे पर बसा एक ऐसा पार्क है जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का बेहतरीन उदाहरण हैं। सन् 2008 में मसूरी चम्बा संभाग के तत्कालीन डी.एफ.ओ. ने धनौल्टी क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर ये शुरूआत की और आठ साल पहले 80-90 लाख रूपये की लागत से बने इस पार्क ने पर्यावरण की सुरक्षा तो संरक्षित की ही, साथ ही अब तक लगभग 2 करोड़ 63 लाख की आय भी उत्पादित कर ली।

एसडीओ एन.के.शर्मा ने युवाओं को बताया कि भारत का वन विभाग किस प्रकार काम करता है और किस प्रकार धनौल्टी ईको पार्क ने अपने प्रयासों से देश के सामने पर्यटन क्षेत्र में उद्यम के नये मॉडल को स्थापित किया। यह पार्क अम्बर और धरा नाम के दो हिस्सों में बंटा है। ऊपरी भाग को अम्बर तथा निचले हिस्से को धरा के नाम से जाना जाता है। इस पार्क के बनने के बाद स्थानीय लोगों को भी रोज़गार मिला। हर साल यहां लगभग डेढ़ लाख पर्यटकों का आना होता है। उन्होंने यात्रा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पर्यटन तथा ईको पर्यटन के बीच का अन्तर भी समझाया। ईको पर्यटन यानि पारिस्थितिकी पर्यटन के अन्तर्गत वे प्राकृतिक स्थान आते हैं जिनमें ज़्यादा छेड़ छाड़ किये बिना और प्रकृति को नुकसान पहुँचाये बिना उसे ख़ूबसूरत बनाने का प्रयास किया जाता है। ऐसी जगहों को एक शोध के ज़रिए चिन्हित किया जा सकता है तथा उन्हें विकसित किया जा सकता है।

गूँज…ए वॉयस, एन एफर्ट

धनौल्टी के बाद यात्रा गूँज,ऋषिकेष पहुँची जहाँ संस्था के संस्थापक-प्रबन्धक एवं रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित अंशु गुप्ता ‘चैम्पस’ से रू-ब-रू हुये जहाँ उन्होंने देश की उन समस्याओं से युवाओं को अवगत कराया जिस ओर आम तौर पर लोगों का ध्यान नहीं जाता। गूँज के प्रयासों एनजेपीसी (नॉट जस्ट ए पीस ऑफ क्लॉथ), ओढ़ा दो ज़िन्दगी, ग्रो ग्रीन बाई गूँज एवं समाज के लिए किये गये उनके और भी कार्यों को युवाओं ने जाना।

अंशु गुप्ता ने शिक्षा,सड़क-सुरक्षा, ग़रीबी,रोटी,कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी ज़रूरतों पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया.जीवन की कड़वी यथार्थता से लोगों का परिचय कराने का प्रयास करते हुये उन्होंने कहा – “हमें गुस्सा आना क्यों बन्द हो गया ? हमें विचारकों की नहीं कर्ताओं की आवश्यकता है.गूंज से प्रेरित हो तो नॉन-गूँज काम करो और तीसरी यात्रा पर मत जाना क्योंकि यात्राओं से जीवन नहीं बदलता.”

गूँज भी जन भागीदारी के कारण ही अपने कार्यों में सफल हो सका, इस बात के कई उदाहरण उन्होंने अपनी बात-चीत के दौरान दिये। गूँज की महिलाओं ने सभी प्रतिभागियों का विशेष स्वागत किया और युवाओं ने उनके काम-काज का जायज़ा भी लिया।

 

 

 

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‘परसंचालित नहीं स्वसंचालित बनें’: डॉ पवन गुप्ता

*युवा प्रेरणा यात्रा-2016, चौथा दिन, कैम्पटी फॉल, उत्तराखण्ड

युवा प्रेरणा यात्रा-2016 का कारवां यात्रा के चौथे दिन मसूरी से 12 किमी. की दूरी पर स्थित कैम्पटी फॉल पहुँचा जहां  सिद्ध संस्था (SIDH -Society  for integrated development of Himalayas) के संस्थापक डॉ. पवन गुप्ता जी ने युवाओं की बुनियादी सीख और समझ को सम्बोधित किया। उनके विचारों से सभी ‘चैम्पस’ भावविभोर हो उठे और सोचने पर विवश हो उठे।

डॉ. पवन गुप्ता ने अपनी मात़ृभाषा का सम्मान करने के प्रसंग में युवाओं से कहा- “ मेरी माँ बदसूरत भी है तो वो मेरी माँ है, जिसके प्रति मेरे हृदय में सम्मान किसी भी कीमत पर कम नहीं हो सकता।” ऐसा कहते हुये वे भावुक हो उठे। उन्होंने आगे कहा- हर विधा की अपनी एक संस्कृति होती है जो आपको एक निश्चित तौर पर व्यवहार करने के लिये आप पर दबाव बनाती है।” इस कारण हम जिस भी परिवेश में रहते हैं वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। मसलन इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट का माहौल, कोर्पोरेट्स का माहौल, मीडिया अथवा अभिजात वर्ग का माहौल इत्यादि। हम कभी अपने आस-पास के लोगों पर अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं तो कभी दूसरों से प्रशंसा पाना चाहते हैं। हम स्वयं के भीतर नहीं झांकते और समाज के परिवेश के अनुसार ही व्यवहार करते हैं जो भले ही हमारे नैसर्गिक स्वभाव के विपरीत ही क्यों न हो। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को भिन्न सिद्ध करना चाहता है लेकिन मौजूदा तंत्र की मुख्य धारा में भी बने रहना चाहता है और ये दोनों ही बातें विरोधाभासी हैं. (“Everybody wants to be unique and wants to be fit in and both the things are controversial.”) हम असुरक्षित हैं क्योंकि हम उत्पादन क्षमता नहीं रखते. (“We are insecure because we can’t produce a single thing.”) “परसंचालित नहीं स्वसंचालित बनें।” अपने दिल की सुनें, दूसरों से शाबाशी पाने के लिए, दूसरों को प्रभावित करने के लिये क्रियान्वित न हों ।

उन्होंने आधुनिक समाज में दी जा रही शिक्षा पद्धति की कमियों को उजागर किया और सीखने’ तथा समझने’ के अन्तर पर बल दिया। उन्होंने सिद्ध की स्थापना एवं उसकी यात्रा की कहानी भी युवाओं से साझा की तथा बताया कि शुरू में सिद्ध के 17 विद्यालय संचालित होते थे जो कि अब घटकर केवल 3 ही रह गये हैं जो आज भी डॉ. गुप्ता द्वारा विकसित की गई तार्किक एवं प्रायोगिक शिक्षा पद्धति से ही संचालित होते हैं।

सिद्ध संस्था मुख्यतः शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है जिसका लक्षित समूह बच्चे, युवा, शिक्षक एवं स्थानीय कम्युनिटी है। सिद्ध आंशिक रूप से वित्त पोषित संस्था है जो कि पूर्ण वित्तीय स्वतंत्रता की ओर बढ़ रही है।

सिद्ध के क्रिया-कलापों में विद्यालयों का संचालन, शिक्षको की ट्रेनिंग से जुड़ी कार्यशाला, युवा कार्यक्रम, शोध प्रोजेक्ट्स और प्रकाशन इत्यादि सम्मिलित हैं।

 

 

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कृषि-क्षेत्र में उद्यमिता की संभावनायें

#युवा प्रेरणा यात्रा-2016, #तीसरा दिन, #धारी कलौगी एवं नवगांव, उत्तराखंड 

यात्रा के तीसरे दिन युवाओं का समूह कृषि क्षेत्र में उद्यमिता की संभावनाओं को तलाशने और कृषि की बारीकियों को समझने उत्तरकाशी जनपद में स्थित धारी कलौगी, विकासखण्ड-नौगांव पहुँचा जहाँ युवाओं ने देवराणा घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक कम्पनी लिमिटेड के अध्यक्ष जयेन्द्र सिंह राना से कृषि क्षेत्र में हुये अनुसंधानों के विषय में जानकारी प्राप्त की। राना जी ने बताया कि किस प्रकार रोपवे लग जाने से पहाड़ के दुष्कर इलाके में फलों एवं दूध की आवाजाही आसान हो सकी और बागबानी एवं पशुपालन के काम को बढ़ावा मिला। उन्होंने किसानों की ज़रूरतों के संदर्भ में युवा वैज्ञानिकों द्वारा नई तकनीकों के विकास का सुझाव रखा और साथ ही यह भी कहा कि किसान का बेटा किसान नहीं बनना चाहता क्योंकि इस क्षेत्र में शिक्षा पर काम किया जाना अभी बाक़ी है। हमें ऐसे पाठ्यक्रमों की आवश्यकता है जिससे नई युवा पीढ़ी अन्य विषयों की ही भांति कृषि विषय का अध्ययन भी विशेष रूप से कर सके। युवाओं द्वारा सरकार से मिलने वाली मदद के सवाल पर उन्होंने कहा कि- तकनीक की उपलब्धता,समय एवं दिशा दे सकती है सरकार लेकिन रास्ता हमें ख़ुद ही तय करना है।”

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हार्क के ग्रामीण सूचना केन्द्र तथा धारी कलौगी में रोपवे फील्ड विज़िट के बाद यात्रा समूह नौगांव, उत्तरकाशी में स्थित हार्क (हिमालयन एक्शन रिसर्च सेन्टर) के फील्ड कार्यालय पहुँचा जहाँ अमृता काला जी ने नौजवानों को हार्क के कार्यों, उसकी पृष्ठभूमि, उसके गठन से लेकर संचालन के बीच आने वाली परेशानियों के विषय में अवगत कराया। हार्क ने सन् 1988 में काम करना शुरू किया एवं सन् 1989 में इसका पंजीकरण सोसाईटी एक्ट के तहत हुआ। हार्क ने पहाड़ी क्षेत्र के स्थानीय लोगों के पारम्परिक, सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय संसाधनों का प्रयोग करके क्षेत्र में कृषि विकास, किसान तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम किया है।

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अमृता जी ने बताया कि हिमालय की विषम परिस्थितियों में नीतियों का क्रियान्वयन करने के लिए हार्क शोध करता है, किसानों की आजीविका के लिए नये स्त्रोत तैयार करता है, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ज़रूरी सूचनायें मुहैय्या कराना, सब्जी उत्पादन, बागबानी, दुग्ध उत्पादन इत्यादि के प्रबन्धन एवं विपणन में किसानों की सहायता करना इत्यादि हार्क के मुख्य कार्य हैं। हार्क इन किसानों के सामान को बाज़ार तक पहुँचाने में सप्लाई चेन की भूमिका अदा करता है।

पहाड़ों पर रोज़गार के साधन उपलब्ध कराना, जलवायु-परिवर्तन से अवगत कराते हुये किसानों को जागरूक एवं प्रोत्साहित करना, उन्हें विषम परिस्थितियों के लिए तैयार करना और कृषि कार्यों को बढ़ावा देने जैसे कार्य भी हार्क के मुख्य प्रयासों का हिस्सा हैं।

अमृता काला आगे कहती हैं कि हार्क से किसानों का एक फेडरेशन और 2 महिला स्टेशन सम्बद्ध हैं। चमोली तथा रमाईं घाटी के लगभग 7000 किसान हार्क से जुड़े हुए हैं । दिल्ली में मदर डेयरी मिल्क स्टेशनों के लिए हार्क  सप्लाई चेन के तौर पर काम करते हुए दूध की सप्लाई में अहम भूमिका निभाता है। रमाई घाटी के युवा खेती की तरफ ध्यान दे रहे हैं और इस इलाके में पलायन की समस्या सबसे कम,मात्र 20% है जबकि शेष 80%  का गाँव में होना इस क्षेत्र के लिए एक अच्छा संकेत है। जैविक(organic) तथा संकरित (Hybrid) दोनों ही प्रकार की कृषि का ज्ञान एवं प्रशिक्षण किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। वो ये भी बताती हैं कि सन् 1998 में लगभग 67 गाँवों में हार्क ने स्वयं सहायता समूह की कैम्पैनिंग का काम किया था जिसमें से लगभग 10 समूह निकलकर आये जो आज भी चले आ रहे हैं और अपनी बचत के माध्यम से वे अपनी ज़रूरतों को पूरा कर पाने में सक्षम हैं।

अमृता पूरे जोश के साथ युवाओं के सभी प्रश्नों का उत्तर देती हैं और साथ में व्यंग्य की चुटकियों और अपने बेबाक जवाबों से माहौल को हंसी और ऊर्जा से भर देती हैं।

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यात्रा आपको एक बेहतर इन्सान बनाती है : जी.के. स्वामी

युवा प्रेरणा यात्रा-2016, 04 अप्रैल, दूसरा दिन, #पुरूकल यूथ डेवलपमेन्ट सोसाइटी

छोटे-छोटे बच्चे बड़ी सी स्क्रीन पर पावर प्वॉइन्ट प्रेज़ेन्टेशन के लिए तैयारी करते हुये, स्लाइड्स जांचते हुये, प्रोजेक्टर लगाते हुये और माइक ठीक करते हुये…..ये नज़ारा था हिमालय की घाटी में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के बीच देहरादून से कुछ दूरी पर बसे पुरूकल गांव के एक विशेष विद्यालय का ।

युवा प्रेरणा यात्रा-2016 अपनी यात्रा के दूसरे दिन और दिन के दूसरे भाग में पुरूकल यूथ डेवेलपमेन्ट सोसाइटी के परिसर में पुहँच चुकी थी जहाँ ‘चैम्पस’ (युवा प्रेरणा यात्रा के प्रतिभागियों को इस नाम से पुकारा जाता है।) रू-ब-रू हुये नन्हें मुन्हें बच्चों से। इस परिसर की विशेषता यही थी कि यहाँ किसी रोल मॉडल की जगह यहाँ के बच्चों ने ही इस परिसर के क्रियान्वयन और विशेषताओं के बारे में युवाओं को अवगत कराया।

पुरूकल यूथ डेवलपमेन्ट सोसाइटी की स्थापना 2003 में जी.के. स्वामी द्वारा पुरूकल और उसके आस-पास के गांवों के ज़रूरतमन्द बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी । आज उनका सपना फल-फूल रहा है । इतना ही नहीं बल्कि जी.के. स्वामी की पत्नी श्रीमती चिन्नी स्वामी  पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के ज़रिये महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी काम कर रही हैं।

जी. के. स्वामी, संस्थापक PYDS #Champion Of YPY-2016

जी. के. स्वामी, संस्थापक PYDS #Champion Of YPY-2016

दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा इन युवाओं को सम्बोधित करते हुये बताती है कि पीवाईडीएस (पुरूकल यूथ डेवेलपमेन्ट सोसाइटी) किस ढांचें पर काम करता है और इस परिसर में बच्चों का प्रवेश किस आधार पर होता है। वो बताती है कि पीवाईडीएस में प्रवेश पाने के लिए कुछ ज़रूरी बातें ये है कि बच्चा ग़रीब परिवार से सम्बन्ध रखता हो जिनकी सालाना आय 1.5 लाख रूपये से भी कम हो , उसे भले ही प्रवेश के समय कुछ भी ज्ञान ना हो लेकिन उसमें आगे बढ़ने की लगन और क्षमता हो ।

वो यह भी बताती है कि ज़रूरतमन्द बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रशासन की एक सर्वे टीम काम करती है जो कि 5 जलग्रहण क्षेत्रों और आस-पास के लगभग 41 गांवों से बच्चों को चुनकर इस विद्यालय तक लाती है और उन्हें गुणवत्ता परक शिक्षा मुहैय्या कराती है।

इसी कड़ी में एक और छात्रा साक्षी चैम्पस को ये बताती है कि किस तरह उनका विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक,मानसिक,भावनात्मक और आध्यात्मिक इन सभी पहलुओं पर काम करता है और बच्चे को एक सम्पूर्ण विकास प्रदान करने का प्रयास करता है।

दसवीं कक्षा की छात्रा मुस्कान बताती हैं कि उनके विद्यालय से पढ़े कितने ही विद्यार्थी विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और आई टी, शिक्षा, मेडिकल आदि विभिन्न क्षेत्रों में उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं। अपने कुछ सीनियर्स का उदाहरण देते हुए मुस्कान अपने बारे में ये भी बताती है कि वो ब्राउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका से प्राप्त छात्रवृत्ति के तहत 2 महीनों के एक समर प्रोग्राम में हिस्सा ले रही हैं। इन सभी अवसरों के लिए वो पीवाईडीएस के दिशा-निर्देशन (एक्सपोज़र कार्यक्रम) को उत्तरदायी मानती हैं।

PYDS में पढ़ने वाले बच्चे चैम्पस के साथ

PYDS में पढ़ने वाले बच्चे चैम्पस के साथ

यात्रा चैम्प विलासिनी जी. के. स्वामी तथा अन्य युवाओं से अपना अनुभव साझा करते हुए एक छात्रा अमीषा का ज़िक्र करती हैं और कहती हैं कि अमीषा ने उन्हें बताया कि वो लोग अपनी पॉकेट मनी के पैसे इकट्ठा कर कॉपी-किताबें, पेन-पेन्सिल आदि स्टेशनरी का सामान ख़रीदते हैं और दूसरे ज़रूरतमन्द बच्चों को उपहार स्वरूप भेंट करते हैं और इस तरह देने की जो आदत इतनी कम उम्र में इन बच्चों में पनप रही है वो उन्हें अभिभूत कर गई। इस अनुभव पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी जी कहते हैं – “ लाइफ़ इज़ फॉर गिविंग (Life is for giving).” यही हमारा उद्देश्य है।

यात्रा चैम्प विलासिनी #YPY 2016

यात्रा चैम्प विलासिनी #YPY 2016

जी.के. स्वामी जी से उनके गुणवत्ता परक शिक्षा कार्यक्रम के स्वरूप होने वाले पलायन के विषय में पूछे गये एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में वे कहते हैं – “ यात्रायें आपको एक बेहतर से भी बेहतर इन्सान बनाती हैं और आप वापस लौट आते हैं अपने देश की सेवा करने के लिये और मैं ये वादा कर सकता हूँ कि आने वाले 10 सालों में ये देश बाहर वालों के लिए सबसे अधिक आकर्षण का केन्द्र होगा और बाहरी लोग भी यहाँ आना चाहेंगे।”

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति की संस्थापक चिन्नी स्वामी युवाओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुये अपनी यात्रा के बारे में बताती हैं कि किस तरह उन्होंने एक महिला के साथ काम करना शुरू किया था और आज लगभग 150 महिलायें पुरूकल स्त्री शक्ति समिति का हिस्सा हैं। चिन्नी स्वामी कहती हैं – “ इस इलाके की अपनी कोई ख़ास विधा नहीं थी इसलिए उन्होंने नई विधाओं से इन महिलाओं को रू-ब-रू कराया। पैच वर्क, कढ़ाई और पाश्चात्य डिज़ाईनों के स्थानीयकरण पर काम किया। स्थानीय डिज़ाईनों पर काम करने के कारण ये उत्पाद उस क्षेत्र में अपनी जगह बना सके। जब महिलाओं ने धन अर्जित करना शुरू किया तो साथ ही वो अपने परिवारों में सम्मान अर्जित कर पाने में भी सफल रहीं। ” उन्होंने इन महिलाओं को सिखाया कि उनके काम में सम्पूर्णता (परफ़ेक्शन) और गुणवत्ता (क्वालिटी) कितनी महत्वपूर्ण हैं। चलता है” वाली सोच से काम नहीं चलेगा।

चिन्नी स्वामी,संस्थापक पुरूकल स्त्री शक्ति समिति...#Champion Of YPY2016

चिन्नी स्वामी,संस्थापक पुरूकल स्त्री शक्ति समिति…#Champion Of YPY2016

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के अन्तर्गत लगभग 10 स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं जो यहाँ से प्रशिक्षण,सहायता और कौशल से जुड़ी मदद बहुत ही कम मूल्य पर प्राप्त करते हैं। स्री शक्ति समिति का ये उद्देश्य है कि ये सभी स्वयं सहायता समूह स्वतंत्र उद्यम के तौर पर विकसित हो सकें और इससे जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के अन्तर्गत कार्य करती महिलायें

पुरूकल स्त्री शक्ति समिति के अन्तर्गत कार्य करती महिलायें

 

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‘जुगाड़ इज़ इनोवेशन’: डॉ. वन्दना शिवा

*युवा प्रेरणा यात्रा-2016, 04 अप्रैल, दूसरा दिन, #नवदान्या बायोडायवर्सिटी फार्म

चारों ओर हरे-भरे आम के बगीचे, ठंडी हवा के बीच बना बरामदा, चारों ओर गूंजता पक्षियों का कलरव और पहाड़ों की धरती उत्तराखंड में प्राकृतिक वातावरण के बीच उद्यमिता का मंत्र तलाशते युवा.ये नज़ारा था युवा प्रेरणा यात्रा-2016 की यात्रा के दूसरे दिन का. यात्रा के पहले पड़ाव पर युवाओं को देहरादून से कुछ दूरी पर रामगढ़ स्थित नवदान्या बायोडायवर्सिटी फार्म में जैविक कृषि पर आधारित मॉडल से रू-ब-रू होने का मौक़ा मिला, जहां डॉ. वन्दना शिवा ने ‘चैम्पस’ को नवदान्या (नवधान्या- नौ प्रकार के अनाज) के सफ़र के बारे में बताया. नवदान्या का अर्थ होता है नौ दाने अर्थात् नौ बीज जो कि जैविक तथा सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक हैं .

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भौतिक विज्ञानी तथा चिपको आन्दोलन में एक स्वयंसेवी की भूमिका निभा चुकी डॉ.शिवा युवाओं को बताती हैं कि भारत बहुधा संस्कृतियों और बहुधा खाद्य-संस्कृतियों का देश है. विविधताओं की भूमि का देश है. हमारे राष्ट्र-गान में ‘पंजाब,सिन्ध,गुजरात,मराठा, द्राविड़,उत्कल,बंग’ की बात की गई है क्योंकि हम भूमि को पूजते हैं  इसलिए इसे बंजर होने से रोकना हमारा कर्तव्य है.हम बाहरी लोगों को हमारी ज़मीन नष्ट करने का अधिकार नहीं दे सकते.”

डॉ. शिवा ने कृषि क्षेत्र में बीजों तथा उर्वरकों इत्यादि का व्यापार करने वाली अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनी मोनसेन्टो से चल रहे विवाद के बारे में भी बताया कि किस प्रकार उन्होंने मोन्सेन्टो को चुनौती दी. मोन्सेन्टो सतत् कृषि (सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) की बात करता है लेकिन उसके द्वारा कृषकों को उपलब्ध कराये जाने वाले राउण्ड अप में ग्लाईफोसेट का इस्तेमाल होता है जो कि कैंसर और किडनी फेल्योर जैसी बिमारियों के लिए उत्तरदाई पाया गया है और इस तरह की कृषि हमारी भूमियों को बंजर बना रही है, साथ ही हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचा रही हैं. वो एक उदाहरण के तौर पर बताती हैं कि यदि विभिन्न तरीके की दालों को दूसरी ऐसी फसलों के साथ उगाया जाये जिनमें खाद के तौर पर यूरिया की आवश्यकता होती है तो ये दालें ही वो काम जैविक रूप से कर देंगी जो यूरिया करता है और इस तरह फसल पूरी तरह प्राकृतिक रहेगी तथा कृत्रिम खाद से बच सकेगी. दालें भी यूरिया की तरह नाइट्रोजन को संतुलित करने का काम करती हैं (Pulses are good nitrogen fixers.).

Dr. Vandana Shiva

एक चैम्प के जुगाड़ को भ्रष्टाचार से जोड़ने पर डॉ. शिवा मज़ाकिया लहज़े में कहती हैं- जुगाड़ इज़ इनोवेशन, जुगाड़ इज़ नॉट करप्शन. ” उनकी ये बात सुनते ही सभी खिलखिला उठते हैं और प्राकृतिक वातावरण में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठती है. वो अपनी इस बात के तर्क में उत्तर-प्रदेश में जुगाड़ से बनाये गये एक ट्रैक्टर की बात भी करती हैं और उसे इनोवेशन कहती हैं. वो युवाओं को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का पाठ पढ़ाती हैं और मानवता को अपनाने को कहती हैं.

युवाओं ने उनके फार्म में विविध प्रकार की फसलों का ज़ायजा लिया और देखा कि किस तरह पूरक फसलों का प्रयोग एक खेत में किया जा रहा है. सालों से बंजर जमीं को जैविक खेती की मदद से ऊपजाऊ बनाया गया. सभी ने एक अनाजा, दो अनाजा, नौ अनाजा, बारह अनाजा और तरह तरह की फसलों के बारे में समझा. साथ ही चना, आलू और अनाज के खेतों सहित कपूर का पेड़ भी देखा जो मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों में ही पाया जाता है.

नवधान्या की सभा के बाद युवा प्रेरणा यात्रा का अगला पड़ाव था पुरूकल यूथ डेवलेपमेन्ट सोसाइटी जहां शिक्षा और स्त्री सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण युवाओं की राह देख रहा था.

 

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उद्यम द्वारा सशक्तिकरण का सफ़र ‘युवा प्रेरणा यात्रा ’

*युवा प्रेरणा यात्रा-2016, 03 अप्रैल-पहला दिन- दून विश्वविद्यालय- उत्तराखंड 

“इधर से गुज़रा था, सोचा सलाम करता चलूँ.” “पत्थर नहीं पहाड़ हैं, युवाओं की दहाड़ हैं.” दून विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में गूंजती ये पंक्तियाँ और तालियों की आवाज़ सभी नवागन्तुकों के मानस पटल पर अंकित हो गईं। मौक़ा था युवा प्रेरणा यात्रा 2016 के आरम्भ का।

हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून 03 अप्रैल 2016 को एक ऐसी यात्रा के आरम्भ की साक्षी बनी जो आने वाले भविष्य में राष्ट्र-निर्माण के लिए  नींव की ईंट का काम करेगी। युवा-प्रेरणा यात्रा-2016, एक ऐसी यात्रा जो युवाओं को केवल उत्साहित ही नहीं करती बल्कि ‘उद्यम द्वारा सशक्तिकरण’ हेतु मार्ग भी प्रशस्त करती है ।  न केवल अपना बल्कि समाज के सशक्तिकरण का पथ प्रदर्शित करती है । यात्रा का आरम्भिक सत्र सुबह 10 बजे दून विश्वविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुआ। जहाँ देश के 20 राज्यों और 3 देशों से आये कुल 85 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

इस यात्रा का आयोजन करने वाले आई फॉर नेशन फाउन्डेशन के संस्थापक नवीन गोयल एवं संस्थापक-प्रबन्धक रितेश गर्ग ने युवाओं को युवा प्रेरणा यात्रा की शुरूआत और आई फॉर नेशन की आधारशिला से अवगत कराया ।

रितेश ने युवाओं को फाउन्डेशन द्वारा समाज हित में किये गये प्रयासों से अवगत कराया। जिसके अन्तर्गत उत्तराखंड त्रासदी के बाद किये गये केदार वैली रिहैबिलिटेशन और नेपाल-आपदा 2015 के बाद लिये गये इनिशियेटिव वी आर टुगेदरके बारे में चैम्पस से अपने अनुभव साझा किये। रितेश ने कहा- हर किसी के लिए राष्ट्र की परिभाषा भिन्न हो सकती है। किसी के लिए राष्ट्र उसका गांव हो सकता है , किसी के लिए उसका समाज तो किसी के लिए उसका देश, और इस तरह हर व्यक्ति अपने राष्ट्र की परिभाषा के हिसाब से समाज हित में योगदान कर सकता है।

सत्र का आरम्भ दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस. के. दादर जी ने किया। यात्रा पर आये “चैम्पस” को सम्बोधित करते हुये उन्होंने कहा- ये यात्रा स्वयं से मिलने की यात्रा है। स्वयं को खोजने की यात्रा है। उन्होंने कहा कि हम जोख़िम लेने वाले युवा तैयार करते हैं।

कार्यक्रम के आरम्भिक सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली शैला जी ने अपने सुख-सुविधा भरे जीवन को छोड़कर बच्चों को शिक्षित करने के अपने सपने तक पहुँचने के सफ़र की दास्ताँ बयां की । साथ ही निवेश के क्षेत्र में (इन्वेस्टमेन्ट ब्रोकर) काम कर चुके विनय नांगिया जी के मार्गदर्शन में युवाओं ने ख़ुद को तलाशने के सफ़र की शुरूआत की।

प्रोफेसर दादर, नवीन गोयल, रितेश गर्ग एवं आई फॉर नेशन फॉउन्डेशन की समस्त टीम ने दीप प्रज्जवलन कर सत्र का आरम्भ किया। कार्यक्रम का संचालन युवा प्रेरणा यात्रा के मुख्य चयन अधिकारी गगन बड़रिया ने किया ।

YPY-DAY-01-LIGHTINING OF THE LAMP

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Yuva Prerna Yatra 2015 – Empowerment through Enterprise

Count Down Begin…….

A Life changing journey is ready to open the door YPY 2015(5th April 2015). 7 days journey with 100 highly passionate and motivate Youth, not just only Youth but the Change Maker and Nation future, who have spark, who have individual capability to do changes, are ready to jump.

YPY is a mission to empower society through enterprise. We strongly believe that sustainable development is an only way to develop prosperous society and strong nation. Our objective is to awaken and develop an entrepreneurial spirit within youth. We want to develop strong pool of Entrepreneurs, who could become a change maker; they could lead from the front and work on local and global complexity and provide a powerful mechanism with their own idea to develop an easy solution/system by involvement of local resource and local people.

This Yatra aims to inspire youth to understand the value of creating sustainable enterprises in localized global context and to spur them to create similar models in their own arenas. Sustainable development require that we see the world as a system—a system that connects space; and a system that connects local resource; a system that connects local people and finally a system that connect time.

100 champions from different-2 demography know the value of social, financial and geographical inclusion.  Ready to share their own study and research about social, financial and geographical challenges. They know the core value of sustainable and inclusive development, but want to explore more, want to understand more, they have spark, passion and strong determination, they have strong believe on themselves, someone have idea, already started to work, someone have idea but want to make it more strong before to start it, someone have but still in dilemma but want to be part this journey, amazing  but ultimate goal of everyone is to create sustainable enterprises to develop sustainable society.

During the 7 days journey, participants meet exceptional “Champions of Change”, the unsung heroes, who not only dared to dream but also translated their dreams into sustainable enterprises by leveraging the local resources and bringing prosperity in the region. They will get chance to understand the social, financial and geographical inclusion deeply, will get to know, how all three play an important role equally.

 

#Empowerment through Enterprise

All our dreams can come true, if we have the courage

Abhishek Singh

 

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Doing Business is Easier in India NOW!

The lower house of Indian Parliament, Lok Sabha Wednesday passed the Companies (Amendment) Bill, 2014 with 14 amendments. Corporate Affairs Minister Arun Jaitley told the house that some of the original provisions were only posing hurdles to doing busincompaniesact_thefirm_356_1139_356ess in the country. He said, “..(previously) A terrorist can get bail, but a company official cannot“, and added; “Are we trying to induce or scare investors,”.

“The object imagesof these amendments is solely to ease the process of doing business in India. None of them have any ulterior motive,” Jaitley, who also holds the Finance portfolio, said replying to the debate on amending the Companies Act, 2013.

“Some of its provisions would have made doing business in India extremely difficult and the investment environment in the country would be disrupted by such a law,” Mr. Jaitley added.

The amendments to the Companies Act are designed to address some issues raised by stakeholders. These amendments include:

Confidentiality of Board Meetings

Among the major concerns of stakeholders were protecting confidentiality of board resolutions. The new amendments prohibit public disclosure of decisions made inside a Board meeting. Citing the provision on the public scrutiny of board resolutions, Jaitley said that nowhere in the world was such a practice being followed. “A company deciding in its board on its next model, a new product trademark or the funding mechanism would not like such matters to be known to competitors,” Jaitley said.

 Approvals made easy

Stakeholders were also concerned that stringent regulations for related party transactions, or those transactions between the company and another in which a board member or members are interested, could hurt routine business activity. The amendment also exempts corporates from the need to get shareholders’ nod in the case of related party transactions valued lower than Rs.100 crore or 10 percent of net worth.

Under the old system, shareholders’ permission through a special resolution was required in case of related party transactions for all firms with a paid up capital of Rs.10 crore or more.

 Requirement of Paid Capital Removed

Earlier, paid up capital of Rs 1 lakh was required for a new private company and Rs 5 lakh for private company, which has been now removed. It is really a great move to support Small and Medium Enterprises.

 Defaulting Company Laws

Officers and employees of the defaulting company, who encouraged and promoted financial scams can now face fine upto Rs 2 crore, with a minimum threshold of Rs 25 lakh and/or prison upto 7 years. And the Director and Founder of such frauds would be fined under Section 447 of the Act, and can be poisoned upto 10 years along with a fine “which shall not be less than the amount involved in the fraud, but which may extend to three times the amount involved in the fraud”.

 Errors related with drafting rectified

There were several drafting errors in the original bill, such as unclaimed shares and dividend. Unclaimed dividend for 7 years is automatically transferred into a investor-protection fund but unclaimed shares does not. From now on, all unclaimed financial assets will be transferred to the investor-protection fund.

 A special section 76A Introduced

76A has been introduced in the bill, which empowers the Government to slap fine upto Rs 10 crore on defaulting companies which raise money from the public and then disappear. In the wake of recent scams such as Saradha Finance in West Bengal and Sahara, this new regulation was indeed required. In any case, the new law states that the fine would not be less than Rs 1 crore in any case. The new amendment states: “in addition to the payment of the amount of deposit or part thereof and the interest due”.

This is a good move to create the business environment for MNCs as well as for Small and medium Enterprises. Where WTO gave low ranking to India for business environment, Government has started working on the ease of business environment in India.

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IT and the Digital Presence in India

It’s a fact that India have performed thinkable growth in IT. If we see the facts: IT contribution to India’s GDP was a merely 1.2% in 1998. But in now this made an impressive growth and now contributing around 8% of India GDP. What, NASSCOM (The National Association of Software and Services Companies) says that the total aggregated revenues for the industry stood at US$100 billion in 2012. US$69.1 billion of this came from exports, while US$31.7 billion came from the domestic market.

The future projection look good too. According to NASSCOM, IT industries will do 14-16% linier growth till 2020.

The Top Indian IT Company have not only Indian presence but they have global presence as well.

Big Cities Dominating the IT Scene

But there is a real problem in India now even with all this. The Indian IT industry have global presence but not spread evenly throughout the Country. In fact, have very presence in India Cities, Bangalore, Hyderabad, Chennai, Pune, Gurgaon, Mumbai, Kolkata and Trivandrum account for as much as 90% of the IT revenue. However on other way, Large sections of our country with close to zero presence of IT industry. And, it’s not just an issue of these area not having adequate business availability but there are serious infrastructure issues like network connectivity, computer, Internet, easy transport facilities even mobile reachability is bigger panic point over there. There are hardly 3G network even rarely get good 2G network without any obstacle always.

The latest Global Information Technology report for the World Economic Forum has ranked India at 68th in its network readiness index out of 140 countries.

This doesn’t look good for a country that wants to emerge as a world leader. Of course that’s too little, considering the presence and importance of IT in the top cities. This is causing a serious digital divide in the country.

The Digital Divide in India

Its unavoidable. There is certain division between the information reached state and information poor state. In India. Still most fundamental challenge in India to find the way to provide an affordable IT solution to several part of our Country.

Information Technology, through computer, mobility, fast moving internet technology like Social media, Digitalization and E-commerce, bringing about a new economic and social paradigm by reorganizing and restructuring the traditional dimension of business availability and reachability within which human live work and communicate. Lack of accessibility is creating a bigger issue within community to manage equalities. If internet is reachable to only to few people, its democratizing potential is never going to be achieved. Its economics and social impact are going touch very limited.

In fact, rapid invention of Information Technology in some part of India is already start creating a bigger difference among the community and society.

Recently Government study demonstrate the IT presence in different-2 state. Its ranked the state on five parameter: etwork learning, network access, network economy, network society, and network policy. The result revealed that four state is doing well IT technology, Karnataka, Andhra Pradesh, Tamil Nadu and Maharashtra, had poor network access.

According to study lowest achievers state is: Assam, Bihar, Jharkhand, Jammu & Kashmir, Nagaland, Arunachal Pradesh.

Digital Divide – Not an India Specific Problem

Digital dividend is not only India issue but it’s a common issue in BRICS as well as developed nation. The World Economic Forum study pointed out that low-income citizens from the developing world have limited access to computers and the internet. They are losing out on social and economic rewards that come with better information and communications technology due to their struggles with digital connectivity.

The United Nations is also raised a concerned. The Information and Technology gap and related inequalities between industries and communities are widening and creating a new challenge for nation to reduce the poverty.

What’s going on in India?

Indian government now realizing an importance of IT and its presence throughout the nation. Government here are well aware about this digital divide and implication. They are also realize that fast economic growth can’t be sustain if digital gap is not bridge throughout the country. And of course the social benefit of growth can’t be properly distributed to lowest section of community.

India can grow with fewer segment of country but it could not create a meaning of any Nation. Till we cannot reach the masses and affect their life positively with Information Technology presence, we can’t say that we are the superpower of information technology.

A lot of initiative have been taken by government body to provide the smooth and better service to lower section of society like ISRO has provide a IT service to Kerala and Andhra fisherman to download data on ocean temperatures from satellites to predict where it’s likely to find fish offshore. Online Passport Seva is another bigger service implemented by government to provide service to masses. Work is also being done to improve internet speed and mobile penetration. National Mission on Education, will make it viable for the weaker sections of the population to own computers as well.

So we are seeing a strong change. With these kind of initiatives, India will surely do much better in near future, But still India has to go so far to cover a large segment of society to end the gap and related inequalities between states and society to transfer the economic boom throughout the Nation and every corner of Society.

 

By

Abhishek Singh

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New Government’s Promise for Indian Entrepreneurs

The recent political changes in India have set a new note and bring up new hope & faith among the Indian & especially in Indian Youth. Fast & bigger range of change at the bureaucracy, alleviating the concerns of industry and improving public sentiment. So far, work done by PM Narendra Modi have helped reignite belief among industry & ordinary citizen, they have hope, now country is back on the track to sustain high growth once again.

I have been looking with my personal interest at announcement that made by PM for Entrepreneurship. He was keen to groom & boost Entrepreneurship in India. And he worked upon it, the most significant step towards it, he has set up a new ministry of Entrepreneurship and Skill Development. However question is remain same, what & how will take to bring more entrepreneurs. How can India break the perception that Indian does not have entrepreneur’s skill?

It seems more complex initially. It will require large level of awareness & participation across the Nation to make India more entrepreneurs friendly country like, Silicon Valley in USA. For this obviously need good infrastructure and entrepreneur’s friendly environment to develop entrepreneur zeal & skill. Government need work on Policy, Bureaucratic procedures and processes for approvals and licences need to get much simpler to make India a country where it is easy to do business. Entrepreneurs need to spend more time working and developing idea and making a products, and managing operations etc. – not chasing Bureaucracy for papers work & for approvals in government offices.

An encouraging step is taken by Prime Minister when he exhorted bureaucrats to think creatively, Innovative & take risk to come out from administrative paralysis. Risk taking can help entrepreneur to get excellent idea through. There are already several shining examples of Indian companies that have gone global thanks to innovative products and smart business strategies. There are already large number of Indian set-upping new start-up & Idea from out of India. For instance, In Silicon Valley, Number of start-up get in form, 40% are Indian but they don’t do in India because unfriendly environment for Entrepreneurs.

In India Context, Current Government has taken steps not largely but obviously Initiated a new hope, But apart from the Government initiative, Corporation & organization are running own set up in India must give way to an open and transparent work environment where new, radical ideas are welcome- and most, noticeable point, where failure is not punishable. The fear of failure is major impediment of Innovative thinking & risk taking. Top honcho must provide infrastructure where entrepreneurs can work on Idea without any fear. A good way to motivate Entrepreneurs, just don’t valuate them based project failure or success but support them to move ahead with valuation lesion for the future. Recognizing individual for the risk they took not just for successful they achieved so far.

When entrepreneurship education started in the late 1980s, it was mainly focused on self-employment. Today, it must focus on to the national agenda of employment generation rather than individual wealth creation. The top business schools are preparing students for entrepreneurship, and a new breed of young entrepreneurs are setting up their own ventures. But it is not at bigger level in India, Few of institution has stared “deferred placements” so that they can come back to the institute after a couple of years if their venture fails. But we now need to replicate these successful models across the rest of the country. Even for 2nd tire & rural education institution as well.

Most important part, perception & thinking about entrepreneurship need to be change. Specifically in North & East India. Our Society must overcome from old tendency to stop our child to not move towards risk taking behaviour. Many of these perception have changed since 1990, but majorly in South & West India, latterly in 2000 its change Central India but still not more motivational in North & East India. When entrepreneurs in the field of information technology emerged as role models for the middle class. More entrepreneurs came from middle-income families as mostly came from Business family only earlier. Today’s several youth in India started their own venture not only economical/ profitable but a lot stared social venture as well. Young love to stare own venture they are passionate with burning desire to live up with entrepreneur zeal.

The Indian government’s announced historic 2014 budget is committed to investments in entrepreneurship and innovation. It has launched a new cell dedicated to “incubation and new ideas”, providing equity and soft loans to start-up companies to the tune of RS10,000 crores, and is also committing RS100 crores to start-up village entrepreneurships. It’s a small step but has been taken formally and decisively. It’s showing the right sprite & intention of Government towards entrepreneurships. May we still have to go miles but Journey has begun & future looks very bright for Entrepreneurs.

By

Abhishek Singh

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